हमारा भोजन कैसा हो?

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भोजन से स्वास्थ्य का गहरा रिश्ता है जो कुछ भी हम खाते-पीते हैं, अगर वह शरीर और पेट के अनुकूल होता है, पौष्टिक और सात्विक होता है तो हमें आरोग्य प्राप्त होता है। हम निरोग और स्वस्थ रहते हैं। यदि हमारा भोजन शरीर, पेट के प्रतिकूल होता है और वह अपौष्टिक एवं असात्विक होता है तो हमारा शरीर बीमार पड़ जाता है। हम रोगावस्था में या सामान्य अवस्था में क्या खायें और क्या न खायें इसका ज्ञान हम सबको ही होना चाहिए, क्योंकि भोजन सबसे बड़ी औषधि है और इसके उचित प्रयोग से हम शरीर में बैठे किसी भी रोग का लाज बखूबी कर सकते हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपने रोग का ज्ञान तो होता है, लेकिन उसके अनुकूल खान-पान का ज्ञान नहीं होता है।

Healthy food tips in hindi

अल्सर:
आमाशय व ग्रहणी में अनेक कारणों से व्रण यानी अल्सर की उत्पत्ति होती है। अनियमित और दूषित घी, तेल व मिर्च-मसालों से बना भोजन जल्दी अल्सर की उत्पत्ति करता है। आधुनिक परिवेश में होटल, रेस्तरां और दूसरी पार्टियों में स्त्री-पुरुष शराब का अधिक सेवन करते हैं। शराब का अधिक सेवन करते हैं। शराब की अधिकता आमाशय व ग्रहणी में व्रण बना देती है। मानसिक तनाव की अधिकता, धूम्रपान, चाय, कॉफी व फास्ट फूड के अधिक सेवन से उदर में अम्लता का समावेश होने से भी व्रण विकृति अधिक होती है। प्रकृति विरुध्द और दूषित भोजन करने से भी व्रण की उत्पत्ति हो जाती है। खाली पेट एलोपैथी दवाइयां सेवन करने से भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है।

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मुख्य लक्षण: आमाशय या ग्रहणी में अल्सर होने पर जब देर तक रोगी कुछ नहीं खाता है और खाली पेट रहता है तब तेज जलन व पीड़ा होने लगती है। जलन से रोगी बेचैन हो जाता है। नाभि के ऊपर व वक्षस्थल में भी पीड़ा होती है किन्तु कुछ खा-पी लेने पर यह पीड़ा दूर हो जाती है। इस रोग में वमन की भी शिकायत होती है और कई बार वमन के साथ रक्त भी निकल आता है। रात्रि में बिस्तर पर होते हुए रोगी को तीव्र जलन और पीड़ा होती है। रोगी के मल के साथ रक्त भी निकलता है।

क्या न खायें : – अचार और सिरके से बनी चीजों को न खायें। बाजर में बिकने वाले खट्टे, चटपटे, चाट-पकौड़े, गोल-गप्पे, दही-भल्ले, समोसे, कचौड़ी-छोले-भठूरे न खायें।

– उष्ण खाद्य-पदार्थों, उष्ण मिर्च-मसाले और अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। चाय, कॉफी का बिल्कुल ही परित्याग कर दें।
– अल्सर रोग में शराब सबसे अधिक हानि पहुंचता है। अधिक शारीरिक श्रम न करें और अधिक पैदल न चलें।
– भोजन ठूंस-ठूंसकर अधिक मात्रा में न करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करें। अरबी, आलू, कचालू आदि को बिल्कुल ही न खायें।

क्या खायें :
– जीरा भूनकर, पीसकर मट्ठे के साथ इस्तेमाल करें। लेकिन मट्ठा खट्ठा नहीं होना चाहिए। बेल गिरी को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और पांच ग्राम चूर्ण जल के साथ सवन करें।
– उबला हुआ और ठंडा किया हुआ दूध पीयें। कब्ज न होने दें। इसके लिए रात्रि को दूध में एरंड का तेल मिलाकर पीयें।
– अल्सर की जलन को शांत करने के लिए नारियल का जल पियें। गाजर के रह का सेवन करें। घीया, तुरई, टिंडे आदि की सब्जी बिना मिर्च-मसाले व तेल के सेवन करें। मिर्च-मसालेदार और छौंकी हुई सब्जियां अल्सर के रोगी को बहुत ही अधिक नुकसान करती है।

भोजन में उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर अल्सर का रोगी जल्दी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता है।

कृपया इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें!

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