अगर बार-बार agar bār-bār आपका अपमान होता āpakā apamān hotā hai है तो रोज़ बोले to roj bole bas ye ek chamatkārī shabd बस ये एक चमत्कारी शब्द

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Power-of-no saying-no1
आईये जाने सफलता के सूत्र को भी

क्रोध-
सफल होने के लिए क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। कभी-कभी यह बहुत कठिन हो जाता है पर इसका दूर गामी परिणाम अच्छा होता है। यह एक प्रकार की साधना है। कोई आपकी आलोचना करे तो क्रोधित न हों। इसी प्रकार कोई प्रशंसा करे तो खुश भी नही होना चाहिए। दोनों स्थितियों में सहज भाव का प्रदर्शन करना चाहिये, सम दृष्टि रखनी चाहिए।कुछ लोग कहते हैं कि परिवार की एकता के लिए किसी के बुरे बर्ताव पर ध्यान नही देना चाहिए, पर ये ठीक नही लगता। एक सीमा के बाद किसी का बुरा बर्ताव सहना कठिन लगने लगता है। कुछ लोग कहते हैं- बड़े कुछ भी कहें, उसे आशीर्वाद मानना चाहिए। पर बड़े जब सरेआम अत्याचार करने पर, आरोप और लांछन लगाने पर उतारू हों तो चुप हो कर रहना उनके आरोपों को सही साबित करना है। और अगर कोई द्वेष वश कुछ हानि करे, सामजिक या आर्थिक, परिपक्व अवस्था में होने के बाद भी बार बार दुष्टता पूर्ण बर्ताव किए जा रहा है, तो क्षमा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में स्वाभिमान की रक्षा नही होती तो एक दिन भयावह स्थिति आ जाती है, और हम उसके शिकार होंगे। इसलिए इसका ख्याल रखना चाहिए कि यह सब एक सीमा तक ही ठीक है। जब सीमा पर होने लगे तब स्वयं को उनके दुर्व्यवहार का पात्र नही बनने देना है।

परिवार हो या रिश्तेदार, किसी को यह हक़ नहीं है कि वो हमेशा नीचा दिखाने का अवसर खोजता रहे। इस विचार से हर कोई सहमत होगा कि अपशब्द कहने का अधिकार किसी को नहीं है। परिवार का ही कोई भी हो, अगर वह सामाजिक लिहाज नहीं रखता, तो ऐसे व्यक्ति से मिलने में भय लगता है।

अपने क्रोध को सकारात्मक तरीके से व्यक्त करें, स्वयं को हीन स्थिति में न आने दें और न ही भयभीत हों। अपनी आंतरिक शक्ति और साहस को बनाये रखें। अपने को स्पष्ट तरीके से पेश करें, अपनी बात स्पष्ट कहें।

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के सामने आ जाते हैं जिसकी उपस्थिति में आप असहज हो जाते है, तो उससे अपने को अलग कर लें, वहाँ से हट जाएँ। पर अगर ऐसा सम्भव न हो, तो जब तक जरुरी हो, रुकें, उसके बाद हट जाएँ। किसी नकारात्मक व्यक्ति को अपनी प्रसन्नता नष्ट करने का मौका न दें। आप अपनी योग्यता और श्रेष्ठता की और जाएँ।

दुष्ट लोगों में हमेशा एक असुरक्षा की भावना रहती है, इसलिए वे नीचा दिखाने के कोई मौके नही छोड़ते। जीवन में यह सब झेलना पड़ता है, प्रायः सभी को। पर आपकी अपनी श्रेष्ठता आपको सफल बना देती है।

तनाव-

अगर आप इसमें डूबे हैं तो क्यों? इस क्यों का जवाब आप ख़ुद से पूछिए, कारण खोजिये, फ़िर उपाय खोजिये।

कभी -कभी अचानक न चाहते हुए भी कुछ हो जाता है जो जीवन में तनाव ला देता है। पर सोचिये, क्या हम समय को बाँध सकते है? नहीं!   इसलिए जो परिवर्तन हुआ उसमें सहजता खोज लीजिये। क्या पता आगे इससे भी बड़ी कोई समस्या हमारा इन्तजार कर रही हो या फ़िर आज के दुःख में कल का सुंदर समय छिपा हो। तनाव में आने पर तरह तरह के कुविचार भी आते हैं, और फ़िर छोटी सी बात बहुत बड़ी लगने लगती है। पर इसमें से निकल आने से बड़ी बात भी छोटी हो जाती है। करके देखिये…!

तनाव में हमारी रचनात्मक शक्ति बिल्कुल, बिल्कुल ख़त्म हो जाती है, और हमारे आस-पास जो कुछ हो रहा होता है, सब ठप्प हो जाता है। हम ठहर जाते हैं, जीवन की गतिविधियों पर बुरा असर पड़ता है, और इस प्रकार का वातावरण हम ख़ुद बनाते हैं। सोच कर देखिये…!

तनाव में आकर हम अपना ही नुकसान करते हैं। हर तरफ़ से हमारा चिंतन परिस्थितियों को सुधारने की तरफ़ होना चाहिए। दुःख में बैठे रहने से कुछ नहीं होने वाला। दुखी बैठे रहने वाले की तो ईश्वर भी नहीं मदद कर सकते। जब हम अपनी मदद करेंगे तो ईश्वर हमारा साथ देगा। है तो यह साहस का काम। वो बहादुर है जो संकट से निकलना जानता है, और अगर भविष्य सुखद बनाना है तो यह करना ही पड़ेगा। ख़ुद को ही करना पड़ेगा।

अच्छे जीवन को पाने के लिए पथ में आने वाले काँटे ख़ुद ही हटाने होंगे। इसलिए चिंता सुखद बदलाव की करना चाहिए।

हमारी सफलता में ईश कृपा भी रहती है और कृपा पाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए। प्रार्थना में बड़ी ताकत होती है। अगर ऐसा न होता तो इसका वजूद न बना रहता। इस अभिव्यक्ति में बड़ी ताकत है, इससे क्षमा की शक्ति बढ़ जाती है, मन शांत होता है और हमारी आंतरिक उर्जा का विकास होता है। कभी-कभी हमारी कामना उसकी ओर से नहीं सुनी जाती। इसका अर्थ यह है की रुको, अभी वक्त नही आया है। हो सकता है कि हमने जो माँगा है, कुछ समय बाद वो हमें इससे बेहतर देना चाहता हो।

कभी तो उसकी तरफ़ से एकदम निषेध हो जाता है, और कभी कामना पूर्ण हो जाती है। उसके निषेध को भी हमें सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए, उसे ईश्वर की सदिच्छा मान कर सहर्ष रहना चाहिए।

एक सफल व्यक्ति के काम करने का तरीका अलग होता है, उसका चिंतन लीक से हटकर होता है। वे यह नही देखते की अमुक ने इसे ऐसे किया है तो हम भी इसी तरह करें। वे उससे बेहतर तरीका खोज लेते हैं। सफल व्यक्ति काम के प्रति गहरी समझ और समर्पण रखते हैं। वे काम के रास्ते में आने वाली रुकावटों के प्रति लापरवाह होते हैं।

काम रूचि वाला हो तो करने में मजा भी आता है। इसलिए जिसमें रूचि हो, उसी काम को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई कार्य कुशलता से किया जाता है, पर  मनचाहा नतीजा नहीं आता, ऐसे में उसी नतीजे में शुभता खोज लेनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति हमेशा आपके खिलाफ हो तो इससे भी काम में बाधा आती है, और उसे लेकर अगर आप तनाव में रहते हैं तो उसका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, और न ही वह सुधरेगा, क्योंकि हो सकता है कि वह ऐसा ही बना हो। कुछ लोग अपने स्वभाव को नहीं छोड़ सकते चाहे आप कुछ भी कर लें। ऐसे में चिंता त्याग कर अपने ताकत बढ़ाएं, अपनी सोच उन्नत करें। दुनिया में हजार ऐसे लोग मिलेंगे, आप किस-किस की चिंता करेंगे? अपनी नकारात्मक सोच को छोड़ देने की आदत बनाएं, अभ्यास करें, जरूर करें। वर्तमान तो सुंदर होगा ही, आनेवाला कल भी सुंदर होगा।

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सदगुण और मूल्यों का समावेश इंसान को बेहतर बनाता है, और ऐसा इंसान ही एक सुंदर परिवार बनाता है, परिवार से समाज, फ़िर समाज से देश सुंदर बनता है। सदगुणी इंसान सबको प्रिय लगता है, और जो हमेशा खुश रहता है, उसके आसपास सब कुछ मुस्कुराता हुआ होता है। सदगुण एक सफल व्यक्ति को धारण करता है।

सदगुण व्यक्ति में हीन भावना नहीं आती है। वह विपरीत समय को अनुकूल बना लेता है, और आत्म विश्वास से सकारात्मक बदलाव लाता है।

सफलता पाने के लिए तन और मन दोनों स्वस्थ रहना चाहिए। तन स्वस्थ रहता है पौष्टिक आहार से, मन स्वस्थ रहता है खुश रहने से। आस्था की राह मन को ताकत देती है। मन की ताकत में धर्म का अहम् कार्य होता है। अगर आप धार्मिक हैं तो धैर्य अवश्य होगा, आत्म नियंत्रण होगा। मन में हमेशा एक उर्जा का प्रवाह बना रहेगा, वह कभी ग़लत काम नहीं करेगा। एक धार्मिक व्यक्ति में उसूल होते हैं, जिनके ख़िलाफ़ वह कभी नही जाता और नीतिक जीवन जीता है।

धार्मिक व्यक्ति उस पर भरोसा करता है जो परम शक्तिशाली है इसलिए आस्थावान व्यक्ति अधिक सफल होता है। आस्था व्यक्ति को सहन शील बना देती है। आस्थावान व्यक्ति में कष्ट सहने की बहुत क्षमता होती है। वह किसी भी तकलीफ को चुपचाप पी जाता है। हाय हल्ला नही करता, वह रोता भी है तो अपने इष्ट के सामने। उसकी आस्था उसे दुनिया के सामने नहीं रोने देती। एक धार्मिक मानव अन्य लोगों की अपेक्षा २५% अधिक खुश रहता है और सफल भी।

दुःख, पीड़ा या बाधा को जीवन का हिस्सा मानो, ऐसा संत कहते आए हैं और देखने में भी आता है। जैसे रास्ते में पहाड़, नदी, नाले, कांटे सब आते हैं, पर हम अपना रास्ता बना कर पार कर लेते हैं, इसी प्रकार जीवन पथ में सबकुछ मिलता है, बात होती है अपने विवेक को व्यवहार में लाने की। अपने कौशल और बुद्धि से हम अपना रास्ता बेहतर बना सकते हैं, अपना जीवन सँवारना बहुत कुछ अपने हाथ में होता है। हमें अपने आस-पास कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे।

व्यर्थ के विचार हमारी चिंता के कारण बनते हैं, इनको मन में नहीं आने देना चाहिए और अपने लक्ष्य पर नजर रखना चाहिए, अपनी गति तेज़ करनी होगी ताकि जल्दी रास्ता कट जाए। सजगता भरी नजर रखनी चाहिए, सजग न रहने पर धोखा मिलेगा। आजकल तो बैंक में भी धोखा मिलता है, वहां के कर्मचारी ही आपको ठग लेंगे अगर आप पूर्ण सावधान नही हैं। एक समय ऐसा था जब अंगूठा छाप आदमी भी बेधड़क बैंक जाकर अंगूठा लगाकर रकम जमा कर आता था। आज तो बड़ी सफाई से वहाँ पैसे हड़प लिए जाते हैं। आज बैंक के कर्मचारी ग्राहक की सुविधा से मतलब नहीं रखते, इसलिए अपनी सजगता ही काम आती है।

जीवन में सफल होने के लिए कार्य की कुशलता और लगन मूल मन्त्र होना चाहिए। तनाव के साथ काम करना काम को बिगाड़ देता है। काम कुछ भी हो, कोई भी हो, मन लगा कर करना, सफलता का सूत्र है।

अगर आप खाली हैं तो कुछ काम निकाल लें ताकि मन उलझनों से दूर रहे। जैसे- घर की सफाई, पेड़ पौधों की देख-रेख, पक्षियों को दाना देना, पालतू पशु है तो उसके साथ खेलना, घर की पुरानी और बेकार वस्तुओं को निकालना, और अगर ये भी न करने को हो तो ख़ुद की देख-रेख करना, ख़ुद को सँवारना चाहिए। इससे भी मन खुश हो जाएगा, अपनी देख भाल करना भी एक जरुरी काम है।

अपने को उर्जावान बनाये रखने के लिए सुबह ही अपनी कार्य प्रणाली तय कर लें कि आज क्या-क्या करना है, अपनी कौन सी कमी से मुक्त होना है। आप सोचें कि आज का दिन किस प्रकार आप बहुत अच्छा बना सकते हैं। केवल जी लेना ही पर्याप्त नहीं मानना चाहिए, यह तो सब कर लेते हैं। आप अपने हर काम को उत्सव बना लें, खान-पान, व्यवहार, वार्तालाप, पहनावा सब कुछ। अपने खुश होने का यह अच्छा स्रोत है।

आप अपने इष्ट के ध्यान में डूब जाएं, कुछ देर सुंदर कल्पना में खो जाएं। फ़िर नए-नए आयाम खुलने लगेंगे, आत्म विश्वास बढेगा। अपने बगीचे को सुंदर बनाएं, प्रकृति को जगह दें, आप पुलकित रहेंगे। सुबह की लाली को निहार कर देखिये, सुबह की हवा ताज़ी खुशबू से भरी होती है, इसके साथ रहकर ताजगी आती है, उत्साह आता है। जीवन में सफलता लाने के लिए खुश रहना बहुत आवश्यक है। दुखी मन अपनी योजनाओं को आकर नही दे पाता। खुश रहना है या दुखी रहना है यह बहुत कुछ आपने पर निर्भर है।

जीवन में ऐसा भी होता है कि किसी काम को हम शुरू करते हैं बड़े उत्साह से, पूर्ण सफलता की कामना के साथ, पर पर बीच में बुझ से जाते हैं, उत्साह गिर जाता है, तो ऐसे में अपना काम बंद नही करना चाहिए, उसे अपनी योजना के अनुसार करते रहना चाहिए।

जीवन में उत्साह कायम रखने के लिए भी उपाय करते रहे अपने आस पास के कामयाब लोगो का संग करे ,अच्छी पुस्तके पढ़ें ,प्रसिद्ध विचारों को पढ़े ,उनका संग्रह करे ,प्रेरणा दायक विचारों को लिखकर अपने सामने रखे उनको रोज पढ़े उत्साह वर्धन होगा । धीरे धीरे उसे अपनी चेतना में बसा ले भावनाए स्वतः सकारात्मक होती जायंगी । जीवन की बाधाओं से लड़ने की कुशलता आएगी । अपने आप से वादा करें की खुश रहना है ,कुछ करना है ,मुसीबतों को सहज लेना है ,खुशी को भरना है जीवन सरल हो जायगा ।

एक बात पर गहराई से विचार करें। जब भी कोई कठिन समय आता है तो वह हमें और अधिक ताकत दे जाता है। इस प्रकार कठिनाइयाँ और अधिक सहस बटोरने का अवसर देती हैं। हम और अधिक सीखते जाते हैं, हमारे अनुभव बढ़ते हैं। आपने अनुभव किया होगा जब शुरू में एक छोटी से चोट बहुत तकलीफ दे जाती थी कुछ समय बाद वही चोट मामूली लगने लगती है क्योंकि तब तक हमारे पास और शक्ति आ जाती है ।

ईश्वर हमें रोज मौका देता है जीवन को उन्नत करने का बस यह हमारी बुद्धि पर निर्भर करता है की हम क्या चुनते हैं और कितना लाभ ले पाते हैं ।

जीवन निरंतर एक चुनाव की प्रक्रिया में रहता है यह सुनने में कुछ अजीब लगता है पर आप , पल -पल सोच कर देखे हमेशा हम एक चुनाव की प्रक्रिया से गुजरते हैं ।

जीवन यात्रा में यात्री को यह मालूम होना चाहिए की हम कहाँ से चलें हैं, कहाँ जाना है । कठिनाइया आए तो कैसे उनसे पार होना है हमें कितनी क्षमता है ,दक्षता है ।

समय कभी नही रुकता न किसी के लिए शोक मनाता है यह निरंतर चलता रहता है इसलिए असफल होने पर पुनः प्रयास करें । विश्स्वास के साथ प्रयास करें संशय हमारे काम को कुशलता से नही होने देता ।

हर पत्थर की तकदीर बदल सकती है ,सलीके से उसे तराशा जाए ।

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